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बारिश और आंधी की चेतावनी, कई राज्यों मे अलर्ट | weather alert

By Shreya

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weather alert – देश के उत्तरी राज्यों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियों का पता लगाया है, जो अगले कुछ दिनों में कई प्रदेशों के मौसम को प्रभावित करने वाला है। राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और हिमालयी क्षेत्रों तक, मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। यह मौसमी बदलाव न केवल तापमान में गिरावट लाएगा, बल्कि तेज हवाओं और वर्षा के रूप में भी अपना असर दिखाएगा।

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पर्वतीय प्रदेशों में हिमपात की तैयारी

हिमालय की ऊंची चोटियों और घाटियों में अगले तीन दिनों के दौरान व्यापक हिमपात होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है। विशेष रूप से 27 जनवरी का दिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए अत्यधिक संवेदनशील माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में न केवल भारी बर्फबारी होगी, बल्कि बर्फीली आंधियों की भी आशंका जताई जा रही है। पहाड़ी इलाकों को जोड़ने वाले प्रमुख राजमार्ग बंद होने की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात व्यवस्था बाधित हो सकती है।

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श्रीनगर सहित कश्मीर घाटी के अधिकांश स्थानों पर तापमान हिमांक बिंदु से नीचे जा चुका है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की विशेष सलाह दी गई है। पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर लेना चाहिए और बिना जरूरत बाहर निकलने से बचना चाहिए। आपातकालीन सेवाओं को भी पूर्ण तत्परता में रखा गया है।

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मैदानी भागों में मौसम का रुख

राजधानी क्षेत्र और इसके आसपास के इलाकों में 27 जनवरी से पूर्व हल्की फुहारों की संभावना बनी हुई है। दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को बादलों की आवाजाही और मौसम में नमी बढ़ने का अनुभव हो सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर जैसे जिलों में भी वर्षा की बूंदों का स्वागत करने की तैयारी रहनी चाहिए। यह बारिश हालांकि हल्की होगी, लेकिन इससे वातावरण में ठंडक और बढ़ेगी।

बिहार के विभिन्न जिलों में इस समय शीत लहर का कहर जारी है। घने कोहरे की चादर सुबह-शाम पूरे प्रदेश को ढके रहती है, जिससे दृश्यता काफी कम हो जाती है। यातायात व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण यहां भी तेज हवाओं और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। पंजाब और हरियाणा में भी कोहरे की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।

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दक्षिण भारत में वर्षा की स्थिति

उत्तर में जहां ठंड और हिमपात का मंजर होगा, वहीं दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में अलग प्रकार की मौसमी गतिविधियां देखने को मिलेंगी। केरल और तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों में 26 जनवरी को बिजली की कड़क और गड़गड़ाहट के साथ वर्षा होने की प्रबल संभावना है। इन राज्यों के निवासियों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की जरूरत है। तटीय इलाकों में समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं, इसलिए मछुआरों को समुद्र में जाने से परहेज करना चाहिए।

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मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह वर्षा सामान्य मानसूनी गतिविधियों से अलग है और पश्चिमी विक्षोभ के साथ-साथ अन्य वायुमंडलीय परिस्थितियों का परिणाम है। कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी बादल छाए रहेंगे और हल्की बौछारें पड़ने की आशंका है। इस मौसमी बदलाव से खरीफ फसलों को कुछ राहत मिल सकती है।

तापमान में गिरावट की चेतावनी

आगामी 48 घंटों के बाद देश के अधिकांश उत्तरी और मध्य भागों में न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय कमी आने वाली है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि पारा 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़क सकता है। यह गिरावट विशेष रूप से रात और सुबह के समय अधिक महसूस होगी। लोगों को गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

ठंड बढ़ने से सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। चिकित्सकों की सलाह है कि गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें, पौष्टिक भोजन लें और शरीर को गर्म रखने के उपाय करें। सड़कों पर बेघर लोगों और पशुओं के लिए भी यह समय कठिन होने वाला है। समाज सेवी संगठनों को ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

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किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

कृषि समुदाय के लिए यह मौसमी परिवर्तन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। रबी की फसलें इस समय महत्वपूर्ण अवस्था में हैं और अचानक होने वाली वर्षा या पाला इन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। किसान भाइयों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलों को पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करना उपयोगी हो सकता है।

जो किसान सब्जियों की खेती कर रहे हैं, उन्हें अपनी फसलों को ढकने की व्यवस्था करनी चाहिए। पॉलीथिन की चादर या अन्य आवरण का उपयोग करके नाजुक पौधों को ठंड और बारिश से बचाया जा सकता है। फलों के बगीचों में भी उचित देखभाल की आवश्यकता है। धुआं करने जैसे पारंपरिक तरीके भी पाले से बचाव में कारगर सिद्ध होते हैं। कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करके उचित सलाह लेना भी लाभदायक रहेगा।

यातायात और दैनिक जीवन पर प्रभाव

मौसम में इस बदलाव का असर परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ेगा। घने कोहरे के कारण रेल सेवाएं पहले से ही प्रभावित हो रही हैं और कई ट्रेनें लेट चल रही हैं। हवाई यातायात में भी व्यवधान की संभावना है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए और अतिरिक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।

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सड़क मार्ग पर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतें। कोहरे में वाहन धीमी गति से चलाएं और पर्याप्त दूरी बनाए रखें। रात्रि यात्रा से यथासंभव बचें। पहाड़ी इलाकों में जाने की योजना बना रहे लोगों को मौसम की नवीनतम जानकारी प्राप्त करके ही आगे बढ़ना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में संपर्क के लिए आवश्यक नंबर अपने पास रखें।

मौसम का यह बदलाव प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है, लेकिन इसके प्रभावों को कम करने के लिए हमें सचेत रहना होगा। नागरिकों से अपेक्षा है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और आवश्यक तैयारियां करें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें। स्थानीय प्रशासन को भी आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहना चाहिए।

मौसम की ताजा जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों पर निर्भर रहें और अफवाहों से बचें। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अप्रमाणित सूचनाओं पर विश्वास न करें। आधिकारिक मौसम बुलेटिन और समाचार चैनलों से जानकारी प्राप्त करें। आपसी सहयोग और सतर्कता से हम इस मौसमी चुनौती का सामना सफलतापूर्वक कर सकते हैं। सभी को सुरक्षित रहने और स्वस्थ रहने की शुभकामनाएं।

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