IMD – देश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने की तैयारी में है। आने वाले समय में चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ और सक्रिय होते पश्चिमी विक्षोभ की वजह से कई प्रदेशों में गंभीर मौसमी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस दोहरे मौसमी दबाव के चलते विभिन्न राज्यों में तीव्र वर्षा, तेज आंधी और ठंड में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपने ताजा पूर्वानुमान में यह स्पष्ट किया है कि पहले से जारी कठोर शीतलहर के बीच अब वर्षा का दौर शुरू होने से आम जनता की परेशानियां कई गुना बढ़ने वाली हैं। किसानों से लेकर शहरी आबादी तक सभी को इस मौसमी उथल-पुथल के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव अचानक और व्यापक स्तर पर होगा।
चक्रवात ‘मोंथा’ का प्रभाव क्षेत्र
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ 28 जनवरी की तारीख से देश में अपना असर दिखाना प्रारंभ कर देगा। यह तूफानी प्रणाली मुख्य रूप से उत्तर भारत के मैदानी प्रदेशों को अपनी चपेट में लेगी। इसके अलावा मध्य भारत के विभिन्न भागों में भी इसका गहरा प्रभाव महसूस किया जाएगा। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि इन क्षेत्रों में मध्यम से लेकर अत्यधिक मात्रा में वर्षा होने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
तूफान के साथ आने वाली तेज हवाएं कई स्थानों पर रफ्तार पकड़ सकती हैं, जिससे पेड़-पौधों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। शहरी इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का भी खतरा बना रहेगा।
पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता
पश्चिमी विक्षोभ, जो पश्चिमी दिशा से आने वाली एक मौसमी प्रणाली है, इस समय अत्यंत सक्रिय अवस्था में है। यह प्रणाली वायुमंडल में नमी की मात्रा को काफी बढ़ा देती है, जिसके परिणामस्वरूप बादलों का निर्माण होता है और वर्षा की संभावना प्रबल हो जाती है। इस बार पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद है।
जब यह विक्षोभ चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ के साथ मिलकर कार्य करेगा, तो इसका संयुक्त प्रभाव और भी गंभीर हो जाएगा। दोनों मौसमी प्रणालियों के इस संयोजन से मौसम में अप्रत्याशित बदलाव आ सकते हैं। वायुमंडलीय दबाव में उतार-चढ़ाव के कारण मौसम की भविष्यवाणी करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
गणतंत्र दिवस के बाद की स्थिति
भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञों का अनुमान है कि 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के उत्सव के पश्चात ही आकाश साफ होगा और धूप निकलने की संभावना बनेगी। इससे लोगों को चल रही कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, यह राहत अस्थायी प्रकृति की होगी और शीघ्र ही मौसम फिर से अपना रुख बदल सकता है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि शीतलहर अभी पूर्णतः समाप्त नहीं हुई है। फरवरी और मार्च के महीनों में भी ठिठुरन भरी ठंड का अनुभव होता रहेगा। पश्चिमी विक्षोभ की निरंतर सक्रियता के कारण वातावरण में नमी बनी रहेगी, जो शीत की तीव्रता को और बढ़ा देगी। रात और सुबह के समय तापमान में गिरावट विशेष रूप से महसूस की जाएगी।
कृषि क्षेत्र के लिए चुनौतियां
किसान समुदाय के लिए यह मौसम परिवर्तन बड़ी चुनौती लेकर आ रहा है। रबी की फसलें जो वर्तमान में खेतों में खड़ी हैं, उन्हें भारी वर्षा और तेज हवाओं से काफी नुकसान पहुंच सकता है। गेहूं, चना, सरसों जैसी प्रमुख फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं। अचानक होने वाली बारिश इन फसलों को गिरा सकती है या उनमें बीमारियां फैला सकती है।
कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलों को खेतों से शीघ्र निकाल लेना चाहिए। जो फसलें मंडियों में पहुंचाई जा चुकी हैं, उन्हें ढककर सुरक्षित रखना अनिवार्य है। खुले में रखा अनाज बारिश में भीगकर खराब हो सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। बागवानी फसलों, विशेषकर फूलों और सब्जियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
पशुपालन और सुरक्षा उपाय
पशुधन की सुरक्षा भी इस मौसम में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। मवेशियों को ठंड और बारिश से बचाने के लिए उचित व्यवस्था करनी होगी। खुले में बंधे जानवरों को सुरक्षित आश्रय में रखना चाहिए। दुधारू पशुओं की विशेष देखभाल आवश्यक है क्योंकि अचानक मौसम परिवर्तन से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।
कृषि उपकरणों और यंत्रों को भी सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। तेज हवाओं से हल्के उपकरण उड़ सकते हैं या क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस की मजबूती की जांच करनी चाहिए ताकि आंधी-तूफान में वे ढह न जाएं।
शहरी क्षेत्रों में तैयारियां
शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्कता बरतनी होगी। भारी वर्षा के दौरान जलभराव से बचने के लिए नालियों की सफाई सुनिश्चित करें। बिजली के तारों और खंभों से दूर रहें, विशेषकर तेज आंधी के समय। वाहन चालकों को सड़कों पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि फिसलन और कम दृश्यता से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
घर की छतों और खिड़कियों की जांच करें ताकि बारिश का पानी अंदर न आए। पुरानी इमारतों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। आपातकालीन स्थिति के लिए मोबाइल फोन चार्ज रखें और आवश्यक दवाओं का स्टॉक घर में रखें।
यात्रा और परिवहन पर प्रभाव
मौसम की इस अनिश्चित स्थिति में यात्रा योजनाओं पर पुनर्विचार करना उचित होगा। हवाई यातायात में विलंब या रद्दीकरण की संभावना रहती है। रेल सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, विशेषकर उन मार्गों पर जहां जलभराव या पटरियों पर मलबा आने का खतरा हो। सड़क परिवहन सबसे अधिक प्रभावित होता है क्योंकि भारी बारिश में दृश्यता कम हो जाती है।
पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ जाता है। समुद्री तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जाती है। नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की संभावना को देखते हुए सतर्कता आवश्यक है।
चक्रवात ‘मोंथा’ और पश्चिमी विक्षोभ के इस संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न मौसमी परिस्थितियां गंभीर चुनौती पेश करती हैं। सभी नागरिकों को मौसम विभाग द्वारा जारी अधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए और समय-समय पर अपडेट प्राप्त करते रहना चाहिए। आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। सामूहिक सतर्कता और तैयारी से ही इस मौसमी संकट का सामना किया जा सकता है और जान-माल की हानि को न्यूनतम रखा जा सकता है।









