Gold and silver price – कीमती धातुओं के बाजार में गुरुवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब सोने और चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित रूप से तीव्र गिरावट दर्ज की गई। पिछले कई हफ्तों से लगातार नई ऊंचाइयां छूते हुए ये कीमती धातुएं अचानक नीचे की ओर लुढ़क गईं, जिससे पूरे बाजार में हलचल मच गई। यह गिरावट इतनी तीव्र थी कि इसे बाजार की भाषा में ‘क्रैश’ की संज्ञा दी जा रही है।
कीमतों में आई भारी कमी का विवरण
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमतों में लगभग बारह हजार रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट आई है। यह गिरावट एक ही कारोबारी दिन में दर्ज हुई, जो कि अत्यंत असामान्य है। इसी तरह पीली धातु यानी सोने में भी चार हजार रुपये प्रति दस ग्राम की कमी देखी गई। ऐसी अचानक और बड़े पैमाने पर आई गिरावट ने उन लोगों को काफी राहत प्रदान की है जो लंबे समय से ऊंची कीमतों के कारण खरीदारी से परहेज कर रहे थे।
बुधवार को चांदी का भाव तीन लाख पच्चीस हजार छह सौ दो रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन अगले ही दिन यह तीन लाख पंद्रह हजार रुपये के आसपास आ गई। चौबीस कैरेट शुद्ध सोने की बात करें तो यह एक लाख बावन हजार आठ सौ बासठ रुपये प्रति दस ग्राम से घटकर एक लाख अड़तालीस हजार सात सौ पचहत्तर रुपये के स्तर पर आ गया।
वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य और बाजार पर प्रभाव
इस नाटकीय परिवर्तन के पीछे अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भूमिका अहम रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से वैश्विक व्यापार और राजनीतिक समीकरणों में उथल-पुथल का दौर चल रहा है। उनके द्वारा विभिन्न देशों और क्षेत्रों के प्रति अपनाई जा रही आक्रामक नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी थी।
वेनेजुएला और ईरान जैसे देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ पर भी व्यापारिक शुल्क लगाने की धमकियां दी जा रही थीं। इसके अलावा, ग्रीनलैंड को लेकर भी विवादास्पद बयान आते रहे, जिससे नेटो सहयोगियों में भी चिंता का माहौल बन गया था। इन सभी घटनाक्रमों ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का वातावरण निर्मित कर दिया था।
सुरक्षित निवेश की तलाश और कीमती धातुओं की मांग
जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक और भरोसेमंद विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी सदियों से ऐसे ही सुरक्षित निवेश के साधन माने जाते रहे हैं। इसी कारण पिछले कुछ सप्ताहों में जब वैश्विक तनाव बढ़ा, तो दुनिया भर के निवेशकों ने बड़े पैमाने पर इन कीमती धातुओं में पैसा लगाना शुरू कर दिया।
इस बढ़ती मांग के परिणामस्वरूप सोने और चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही थीं। भारतीय बाजार में भी यह प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। घरेलू निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत खरीदार भी इन धातुओं की खरीदारी में सक्रिय हो गए थे, जिससे कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रहा।
ट्रंप के बयानों में बदलाव और बाजार की प्रतिक्रिया
हालांकि, हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला। उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अपनी स्थिति को नरम करते हुए कहा कि वे एक ऐसे समाधान की दिशा में काम करेंगे जो अमेरिका के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ नेटो के सहयोगी देशों को भी संतुष्ट कर सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अत्यधिक कठोर रुख अपनाने से यूरोपीय राष्ट्रों में अमेरिकी निवेश प्रभावित हो सकता है।
इस संतुलित और समझौतावादी दृष्टिकोण ने वैश्विक बाजारों में एक सकारात्मक संदेश भेजा। निवेशकों को लगा कि शायद स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी पहले दिखाई दे रही थी। इससे जोखिम उठाने की क्षमता में वृद्धि हुई और सुरक्षित आश्रयों से पैसा निकलकर अन्य निवेश विकल्पों की ओर बहने लगा।
बाजार विश्लेषकों की राय
बाजार के जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट भले ही अचानक और बड़े पैमाने पर आई हो, लेकिन इसे पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं कहा जा सकता। जब कीमतें बहुत तेजी से और बिना किसी ठोस आधार के बढ़ती हैं, तो सुधार की संभावना हमेशा बनी रहती है। वर्तमान स्थिति में राजनीतिक कारकों ने इस सुधार को ट्रिगर करने का काम किया है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशकों को अभी भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में अभी भी अनिश्चितता के कई तत्व मौजूद हैं। व्यापार युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, और मुद्रास्फीति जैसे मुद्दे अभी भी प्रासंगिक बने हुए हैं। इसलिए आने वाले समय में फिर से उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
घरेलू खरीदारों के लिए अवसर
आम भारतीय उपभोक्ताओं और खरीदारों के लिए यह गिरावट एक अच्छे अवसर के रूप में देखी जा रही है। जो लोग शादी-विवाह या अन्य शुभ अवसरों के लिए सोने-चांदी के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे थे लेकिन ऊंची कीमतों के कारण इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह उचित समय हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि बड़े निवेश से पहले बाजार की स्थिति को कुछ दिनों तक देखना उचित रहेगा।
ज्वैलर्स और सुनार भी इस गिरावट को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ सप्ताहों में बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारी में काफी कमी आई थी। अब जब दाम घटे हैं तो ग्राहकों की दुकानों में वापसी की उम्मीद बढ़ गई है।
तकनीकी विश्लेषण और भविष्य की संभावनाएं
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, सोना और चांदी दोनों ने महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों को तोड़ा है, जो आगे और गिरावट की संभावना को इंगित कर सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यह एक अस्थायी सुधार हो सकता है और मध्यम से दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में कीमती धातुओं का दृष्टिकोण अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, आगे भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित करती रहेगी। यदि मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहती है और आर्थिक विकास स्थिर रहता है, तो कीमतों में संतुलन बना रह सकता है।
सोने और चांदी की कीमतों में आई यह अचानक गिरावट वैश्विक बाजारों की अस्थिरता और राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सबक है कि बाजार में निवेश करते समय वैश्विक परिदृश्य पर नजर रखना कितना आवश्यक है। वर्तमान स्थिति में सावधानी के साथ निवेश का दृष्टिकोण अपनाना ही समझदारी होगी। जो लोग दीर्घकालिक निवेश की सोच रहे हैं, उनके लिए यह गिरावट एक अच्छा प्रवेश बिंदु हो सकता है, बशर्ते वे बाजार के जोखिमों को समझते हों।



