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तबाही मचाएगा तूफान ‘मोंथा’! अगले 24 घंटे होंगे भारी, खतरा | Cyclone ‘Montha

By Shreya

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Cyclone ‘Montha – प्रिय किसान साथियों, वर्तमान समय में हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते कई राज्यों में वर्षा और ओलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने इस संबंध में किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आने वाले दिनों में मौसम का रुख कैसा रहने वाला है और हमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

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वर्तमान मौसमी स्थिति का विश्लेषण

इस समय राजस्थान के ऊपरी क्षेत्रों में चक्रवाती पवनों का एक सशक्त तंत्र स्थापित हो चुका है। यह प्रणाली अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी दोनों से आर्द्रता को अपनी ओर खींच रही है। परिणामस्वरूप महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों में वर्षा की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। कई स्थानों पर तो वर्षा के साथ-साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की जा रही है, जो फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

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महाराष्ट्र के विदर्भ अंचल में पिछले कुछ घंटों से बादल गरजने और बिजली कड़कने के साथ बारिश हो रही है। मध्य प्रदेश के मध्यवर्ती भागों में भी समान परिस्थितियां बन रही हैं। किसान भाइयों को चाहिए कि वे अपनी फसलों की नियमित निगरानी रखें और आवश्यक उपाय समय रहते करें।

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28 जनवरी की मौसम पूर्वानुमान

आगामी 28 जनवरी को यह मौसमी व्यवस्था पूर्व दिशा की ओर अग्रसर होने लगेगी। उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र तथा पूर्वांचल के जिलों में हल्की से मध्यम श्रेणी की वर्षा होने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। इन क्षेत्रों के कृषकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। गेहूं, चना, मटर और अन्य रबी फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं।

बिहार राज्य के वे जिले जो उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़े हुए हैं, वहां भी कल प्रातःकाल से दोपहर के मध्य वर्षा की गतिविधियां देखी जा सकती हैं। मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों विशेषकर रीवा, सीधी और सिंगरौली जिलों में भी मौसम खराब रहने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में खेती-बाड़ी के कार्यों को यथासंभव स्थगित रखना उचित होगा।

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आने वाले दिनों का मौसम पूर्वानुमान

29 और 30 जनवरी को यह मौसमी प्रणाली धीरे-धीरे पूर्वोत्तर दिशा में आगे बढ़ जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर शेष देश में मौसम स्वच्छ और शुष्क होने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रणाली के गुजर जाने के पश्चात पुनः शीत लहर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में तापमान में गिरावट आएगी और कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है।

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राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रातःकाल के समय घने कोहरे की चादर छा सकती है। मौसम विभाग ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है कि दृश्यता अत्यंत कम हो सकती है। यह स्थिति यातायात और दैनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

पर्वतीय क्षेत्रों में हिमपात की संभावना

पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले स्थानों पर मध्यम से भारी हिमपात हो सकता है। निचले पहाड़ी इलाकों में वर्षा होगी। इसके परिणामस्वरूप तापमान में काफी गिरावट आएगी और सर्दी की तीव्रता बढ़ जाएगी।

अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय भागों में 30 जनवरी तक मौसम गीला बना रहेगा। वहां के निवासियों को आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता आवश्यक है।

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किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

प्रिय कृषक बंधुओं, इस मौसमी बदलाव को देखते हुए आपको कुछ आवश्यक कदम उठाने होंगे। रबी की फसलें इस समय महत्वपूर्ण चरण में हैं और अचानक हुई वर्षा या ओलावृष्टि से नुकसान हो सकता है। गेहूं की फसल यदि बालियां निकलने की अवस्था में है तो उसे विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।

चने, मटर, सरसों और अन्य दलहनी तथा तिलहनी फसलों में फूल और फलियां आने का समय है। इस दौरान वर्षा और ओलों से नुकसान की आशंका अधिक रहती है। यदि संभव हो तो फसलों पर सुरक्षात्मक जाल या प्लास्टिक शीट की व्यवस्था करें। सब्जियों की फसलों को भी उचित सुरक्षा प्रदान करें।

पाले और कोहरे से बचाव के उपाय

मौसमी प्रणाली के गुजरने के बाद पाला पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। पाला फसलों के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। इससे बचाव के लिए खेतों में धुआं करने की व्यवस्था रखें। शाम के समय खेत के चारों ओर नमी युक्त घास-फूस या गोबर के उपले जलाएं ताकि धुआं रात भर बना रहे।

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सिंचाई करना भी पाले से बचाव का एक प्रभावी तरीका है। यदि पाला पड़ने की संभावना हो तो शाम के समय हल्की सिंचाई कर दें। इससे तापमान में गिरावट कम होती है। गन्ने की फसल को पाले से बचाने के लिए पत्तियों को बांधकर रखें।

यातायात और दैनिक जीवन पर प्रभाव

घने कोहरे के कारण सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और धीमी गति से गाड़ी चलानी चाहिए। फॉग लाइट का प्रयोग करें और आवश्यक दूरी बनाए रखें। लंबी दूरी की यात्रा से यदि संभव हो तो बचें।

किसान भाई सुबह के समय खेतों में जाने से पहले कोहरे के छंटने का इंतजार करें। कृषि कार्यों को दोपहर के समय करना अधिक उचित रहेगा जब दृश्यता बेहतर हो। मवेशियों को भी ठंड और कोहरे से सुरक्षा प्रदान करें।

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30 जनवरी के बाद अधिकांश क्षेत्रों में मौसम स्थिर होने की उम्मीद है, परंतु शीत की तीव्रता बनी रहेगी। किसान भाइयों को नियमित रूप से मौसम की जानकारी लेते रहना चाहिए। स्थानीय कृषि विभाग और मौसम केंद्रों से संपर्क बनाए रखें। अपने क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार ही कृषि कार्यों की योजना बनाएं।

फसल बीमा योजना का लाभ अवश्य लें ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। खेती के आधुनिक तरीके अपनाएं और मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करें। इन सावधानियों से आप अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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