Senior Citizen – भारतीय रेलवे ने 2026 के आरंभ में देश के बुजुर्ग नागरिकों को एक सुखद समाचार दिया है। लंबे इंतजार के बाद रेलवे प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए टिकट शुल्क में रियायत और निचली बर्थ आवंटन की सुविधा को पुनः प्रारंभ कर दिया है। यह कदम उन लाखों बुजुर्ग यात्रियों के लिए राहत का संदेश लेकर आया है जो वर्षों से इन सुविधाओं की बहाली की प्रतीक्षा कर रहे थे। रेलवे का यह निर्णय वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और उनकी यात्रा सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महामारी के दौरान सुविधाओं का निलंबन
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भारतीय रेलवे को अनेक कठोर निर्णय लेने पड़े थे। इन्हीं कठिन फैसलों में से एक था वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली किराया छूट को अस्थायी रूप से समाप्त करना। इस निर्णय का उद्देश्य उस समय की आपातकालीन परिस्थितियों से निपटना था, लेकिन इसका प्रभाव बुजुर्ग यात्रियों पर गहरा पड़ा। टिकट मूल्यों में वृद्धि के कारण अनेक वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी आवश्यक यात्राएं भी स्थगित करनी पड़ीं। विगत तीन-चार वर्षों से सामाजिक संगठनों और यात्री संघों द्वारा निरंतर मांग की जा रही थी कि इस महत्वपूर्ण सुविधा को पुनः बहाल किया जाए।
किराया रियायत की नवीन योजना
रेलवे द्वारा घोषित नई व्यवस्था के अनुसार 60 वर्ष अथवा इससे अधिक आयु वर्ग के पुरुष यात्रियों को रेल टिकट शुल्क में 40 प्रतिशत तक की कटौती का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही 58 वर्ष या उससे ऊपर की आयु की महिला यात्रियों और ट्रांसजेंडर श्रेणी के यात्रियों को 50 प्रतिशत तक की रियायत दी जाएगी। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह छूट वर्तमान में केवल स्लीपर श्रेणी और तृतीय वातानुकूलित कोच तक ही उपलब्ध होगी। राजधानी एक्सप्रेस, वंदे भारत, तेजस एवं अन्य विशेष ट्रेनों में यह सुविधा लागू नहीं की गई है।
निचली बर्थ आवंटन की पुनर्स्थापना
भारतीय रेलवे ने बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोअर बर्थ प्राथमिकता व्यवस्था को भी फिर से लागू कर दिया है। अब जब कोई वरिष्ठ नागरिक ऑनलाइन माध्यम से आरक्षण कराएगा, तो स्वचालित प्रणाली निचली बर्थ आवंटित करने का प्रयास करेगी। यदि उपलब्धता होगी तो निचली बर्थ स्वतः ही आवंटित हो जाएगी। यह व्यवस्था बुजुर्गों को ऊपरी बर्थों पर चढ़ने-उतरने के खतरे से बचाएगी और उनकी यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाएगी।
यात्रा में सुरक्षा एवं सुविधा का महत्व
निचली बर्थ की उपलब्धता वरिष्ठ नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। रात्रि के समय शौचालय जाने या पानी लेने के लिए उठने-बैठने में उन्हें कोई कठिनाई नहीं होती। अपना सामान भी वे आसानी से संभाल सकते हैं और आराम से सो सकते हैं। इससे गिरकर चोट लगने अथवा दुर्घटना की आशंका न्यूनतम हो जाती है। समग्र रूप से यह सुविधा उनकी यात्रा को तनावरहित और आत्मविश्वास से भरपूर बनाती है। बुजुर्गों के परिवारजनों को भी इस व्यवस्था से मानसिक शांति मिलती है।
पात्रता मानदंड एवं आयु सीमा
रेलवे प्रशासन ने पात्रता के नियमों को पूर्णतः स्पष्ट किया है। पुरुष यात्रियों के लिए न्यूनतम आयु सीमा 60 वर्ष निर्धारित की गई है जबकि महिला और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए यह सीमा 58 वर्ष रखी गई है। यात्रा के दौरान उम्र का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके लिए आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई अन्य दस्तावेज साथ रखना आवश्यक है। टिकट निरीक्षण के समय इन दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
ऑनलाइन बुकिंग में सावधानियां
ऑनलाइन टिकट आरक्षण कराते समय यात्रियों को IRCTC की अपनी प्रोफाइल में जन्मतिथि सही और स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। प्रोफाइल में उल्लेखित जन्मतिथि के आधार पर ही स्वचालित प्रणाली रियायत की गणना करेगी। यदि जन्मतिथि गलत अथवा अपूर्ण है तो छूट का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए यात्रा से पूर्व अपनी प्रोफाइल की जानकारी अद्यतन करना बेहद जरूरी है। काउंटर से टिकट लेते समय भी आयु प्रमाण दिखाना अनिवार्य होगा।
किन ट्रेनों में लागू नहीं
यह ध्यान देने योग्य बात है कि यह छूट सभी प्रकार की ट्रेनों में उपलब्ध नहीं होगी। राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत एक्सप्रेस, तेजस, गतिमान एक्सप्रेस और अन्य प्रीमियम श्रेणी की ट्रेनों में यह सुविधा लागू नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त प्रथम श्रेणी वातानुकूलित, द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित और एग्जीक्यूटिव श्रेणी में भी यह छूट उपलब्ध नहीं होगी। केवल स्लीपर और थर्ड एसी में ही यात्रा करने पर वरिष्ठ नागरिक इस रियायत का लाभ उठा सकेंगे।
सामाजिक सुरक्षा की दिशा में कदम
रेलवे का यह निर्णय केवल वित्तीय राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वरिष्ठ नागरिकों के प्रति समाज की जिम्मेदारी को प्रदर्शित करता है। बुजुर्ग वर्ग ने अपने जीवन में देश और समाज के विकास में योगदान दिया है। उनकी गरिमा बनाए रखना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना हमारा नैतिक दायित्व है। रेलवे की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है जो वरिष्ठ नागरिकों को आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का अहसास कराता है।
आर्थिक प्रभाव और लाभ
बुजुर्गों के लिए यात्रा व्यय में कमी उनकी सीमित आय के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। अधिकांश वरिष्ठ नागरिक पेंशन अथवा बचत पर निर्भर रहते हैं। टिकट में 40-50 प्रतिशत की बचत उन्हें परिवार से मिलने, धार्मिक स्थलों की यात्रा या चिकित्सा उद्देश्यों के लिए अधिक बार यात्रा करने में सक्षम बनाएगी। यह उनके सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाएगा और अकेलेपन की समस्या को कम करने में मदद करेगा।
वर्तमान में यह सुविधा सीमित श्रेणियों तक ही उपलब्ध है, लेकिन आशा की जा रही है कि आगे चलकर रेलवे इसे अन्य श्रेणियों में भी विस्तारित करेगी। यात्री संगठन मांग कर रहे हैं कि कम से कम द्वितीय श्रेणी वातानुकूलित तक यह छूट बढ़ाई जाए। इसके अतिरिक्त प्रीमियम ट्रेनों में भी आंशिक रियायत की मांग की जा रही है। रेलवे प्रशासन इन सुझावों पर विचार कर रहा है और संभव है कि आने वाले समय में इस दिशा में कदम उठाए जाएं।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे किराये में छूट और निचली बर्थ प्राथमिकता की बहाली एक स्वागत योग्य निर्णय है। यह कदम न केवल आर्थिक राहत प्रदान करता है बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान को भी सुनिश्चित करता है। हालांकि यह सुविधा अभी सीमित है, फिर भी यह सही दिशा में उठाया गया कदम है। भारतीय रेलवे का यह प्रयास वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।









