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सुबह आया चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ मचाएगा तबाही; इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट | Weather Alert Today

By Shreya

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Weather Alert Today – भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में रह रहे लोगों को अगले कुछ दिनों में मौसम के तेवर में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ और पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ती सक्रियता के चलते कई प्रदेशों में वर्षा और तीव्र हवाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक इसलिए है क्योंकि वर्तमान में पहले से ही कड़ाके की सर्दी लोगों को परेशान कर रही है।

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भारतीय मौसम विभाग की भविष्यवाणी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, जनवरी माह के अंतिम सप्ताह से मौसम की परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बदलाव आने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 28 जनवरी के आसपास चक्रवात ‘मोंथा’ अपना प्रभाव दिखाना प्रारंभ कर देगा। इस प्राकृतिक घटना के कारण विभिन्न राज्यों में वायुमंडलीय दबाव और तापमान में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक लगातार इस चक्रवाती प्रणाली की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

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राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों पर प्रभाव

देश की राजधानी दिल्ली और इसके परिधीय इलाकों में घने कोहरे की मौजूदगी के साथ-साथ तीव्र वर्षा होने की प्रबल आशंका व्यक्त की गई है। पिछले कुछ दिनों से ही कोहरे के कारण रेलवे और सड़क परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। दृश्यता में भारी कमी के चलते यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मत है कि गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व के उपरांत ही आकाश में स्पष्टता आने और सूर्य की किरणों के धरती पर पड़ने की संभावना बनती है, जिससे जनता को शीत की तीव्रता से कुछ राहत मिल सकेगी।

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शीतलहर की निरंतरता का अनुमान

मौसम के जानकारों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चल रही कंपकंपाती ठंड अभी पूर्णतः विदा होने वाली नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता बढ़ने के परिणामस्वरूप वायुमंडल में नमी का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाएगा। इस कारण हड्डियों को जमा देने वाली ठंड फरवरी और मार्च जैसे महीनों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहेगी, हालांकि यह रुक-रुक कर होगा। इसका अर्थ है कि सर्दियों का मौसम अपेक्षा से अधिक समय तक बना रह सकता है।

कृषि क्षेत्र के लिए विशेष चेतावनी

व्यापक वर्षा और संभावित तूफानी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, भारतीय मौसम विभाग ने किसान भाइयों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। रबी की फसलें, जो वर्तमान में परिपक्वता के चरण में हैं, तेज हवाओं और अचानक होने वाली बारिश से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। कृषकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी उपज की समय पर कटाई और भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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विभिन्न राज्यों में मौसम का प्रभाव

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मौसम की यह नई करवट विशेष प्रभाव डाल सकती है। इन क्षेत्रों में तापमान में अचानक गिरावट और वर्षा की घटनाएं दर्ज हो सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में हिमपात की संभावना भी बनी हुई है। मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि हो सकती है, जो फसलों के लिए विशेष रूप से हानिकारक साबित हो सकती है। किसानों को अपने पशुधन की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना होगा।

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यातायात और दैनिक जीवन पर असर

कोहरे और बारिश के इस संयोजन से सड़क, रेल और वायु यातायात गंभीर रूप से बाधित हो सकता है। यात्रियों को अतिरिक्त समय का प्रावधान रखना चाहिए और अनावश्यक यात्राओं से बचना चाहिए। विद्यालयों और कार्यालयों के समय में भी बदलाव हो सकता है। दृश्यता में कमी के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए वाहन चालकों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। आपातकालीन सेवाओं के संपर्क नंबर हमेशा अपने पास रखें।

स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां

मौसम में इस अचानक परिवर्तन से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सर्दी-जुकाम, फ्लू और श्वसन संबंधी रोगों के मामले बढ़ सकते हैं। बुजुर्गों और बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होगी। गर्म कपड़े पहनें और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें। नमी बढ़ने से त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को अपनी दवाइयां नियमित रूप से लेनी चाहिए।

तैयारी और सुरक्षा उपाय

नागरिकों को चाहिए कि वे इस मौसमी बदलाव के लिए पूर्व तैयारी कर लें। घर में आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक रखें, जिसमें भोजन सामग्री, पानी, दवाइयां और बिजली के बैकअप शामिल हों। मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखें और पावर बैंक की व्यवस्था करें। छतों और नालियों की सफाई सुनिश्चित करें ताकि जल भराव न हो। पुराने वृक्षों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखें। बिजली के तारों और उपकरणों की जांच करवाएं।

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मौसम विभाग की निगरानी प्रणाली

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग अत्याधुनिक उपकरणों और उपग्रह प्रणालियों के माध्यम से मौसम की लगातार निगरानी कर रहा है। डॉप्लर रडार, मौसम गुब्बारे और अन्य तकनीकी साधनों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। विभाग समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके। आपदा प्रबंधन टीमें भी सतर्क अवस्था में हैं। स्थानीय प्रशासन को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

चक्रवात ‘मोंथा’ और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से उत्तर और मध्य भारत में मौसम का यह नया दौर चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सभी नागरिकों को सतर्क रहने और सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और अफवाहों से बचें। सामूहिक जागरूकता और तैयारी से हम इस मौसमी चुनौती का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं। अपने और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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